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मकर संक्रांति आज, आइये जानते हैं क्या है मान्यताएं

जयपुर। आज मकर संक्रांति का विशेष पर्व का है। साथ ही इस पर्व का व‍िशेष महत्‍व भी है। मकर संक्रांति के बाद सूर्य उत्तरायण होता है, यानी कि पृथ्‍वी का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। परंपराओं के मुताबिक आज के द‍िन सूर्य मकर राश‍ि में प्रवेश करता है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रान्ति रुप में जाना जाता है।

कांसेप्ट इमेज।


उत्तर भारत में यह पर्व 'मकर सक्रान्ति के नाम से और गुजरात में 'उत्तरायण' नाम से जाना जाता है। मकर संक्रान्ति को पंजाब में लोहडी पर्व, उतराखंड में उतरायणी, केरल में पोंगल, गढ़वाल में खिचड़ी संक्रान्ति के नाम से मनाया जाता है।


मकर संक्रान्ति के शुभ समय पर हरिद्वार, काशी आदि तीर्थों पर स्नान का विशेष महत्व माना गया है। आज के दिन सूर्य देव की पूजा-उपासना की जाती है। शास्त्रीय सिद्धांतानुसार सूर्य पूजा करते समय श्वेतार्क तथा रक्त रंग के पुष्पों का विशेष महत्व है। संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा करने के साथ सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। मकर संक्रान्ति के दिन दान करने का महत्व अन्य दिनों की तुलना में बढ़ जाता है। संक्रांति के दिन व्यक्ति को यथासंभव किसी गरीब को अन्नदान, तिल व गुड का दान करना चाहिए। तिल या फिर तिल से बने लड्डू या फिर तिल के अन्य खाद्ध पदार्थ भी दान करना शुभ रहता है।

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मकर संक्रान्ति के साथ जुड़े कुछ पौराणिक तथ्य
मकर संक्रान्ति के साथ अनेक पौराणिक तथ्य जुड़े हुए हैं, जिसमें से कुछ के अनुसार भगवान आशुतोष ने इस दिन भगवान विष्णु जी को आत्मज्ञान का दान दिया था। इसके अतिरिक्त देवताओं के दिनों की गणना इस दिन से ही प्रारम्भ होती है। सूर्य जब दक्षिणायन में रहते हैं, तो उस अवधि को देवताओं की रात्री व उतरायण के छ: माह को दिन कहा जाता है। महाभारत की कथा के अनुसार भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का दिन ही चुना था।

कहा जाता है कि इस दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी। इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है। मकर संक्रान्ति के दिन से मौसम में बदलाव आना आरम्भ होता है। यही कारण है कि रातें छोटी व दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य के उतरी गोलार्द्ध की ओर जाने के कारण ग्रीष्म ऋतु का प्रारम्भ होता है। सूर्य के प्रकाश में गर्मी और तपन बढ़ने लगती है। इसके फलस्वरुप प्राणियों में चेतना और कार्यशक्ति का विकास होता है।


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