• A
  • A
  • A
मायावती बन सकती है, ममता बन सकती है, मांझी बन सकता है तो राजस्थान में जाट मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकता- बेनीवाल

सियासी मैदान में तीसरे मोर्चे को खड़ा करने में जुटे खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने जयपुर की महारैली की तारीख का एलान कर दिया है. इसके बाद से वे रैली को सफल बनाने की तैयारी में जुटे हैं. वहीं, वे भाजपा-कांग्रेस पर भी लगातार निशाना साध रहे हैं....

फोटो पर क्लिक कर देखें वीडियो ।


जोधपुर . चुनाव के मैदान में तीसरे मोर्चे को लेकर सियासी ताल ठोक रहे हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि राजस्थान की 22 फीसदी आबादी अपना मुख्यमंत्री चाहती है. इसे पूरा करने के लिए सभी को एकजुट होना होगा. वे ओसिया के भेड़ गांव में हनुमान साईं के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे.
पढ़ेंः'हनुमान बेनीवाल धोखा देने वालों में से नहीं है'
बेनीवाल ने कहा कि जब मायावती मुस्लिम सहित अन्य जातियों को साथ लेकर मुख्यमंत्री बन सकती हैं. यूपी में मुलायम सिहं के बेटे और बिहार में लालुप्रसाद यादव मुस्लिम-दलित का साथ लेकर मुख्यमंत्री बन सकते हैं. ममता बनर्जी बंगाल में और अरविंद केजरीवाल दिल्ली में मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो राजस्थान में 22 फीसदी आबादी भी अपना मुख्यमंत्री चाहता है. उन्होंने कहा कि एक बार अपना मुख्यमंत्री बन गया तो आराम से फुटबॉल खेलना. जहां इच्छा हो वहां गोल कर देना कोई भी रोकने वाला नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मुझे राजस्थान में राजनीति करने का कोई शौक नहीं है. मैने केवल यहां एक आंदोलन छेड़ा था. लेकिन, राजस्थान के विकास के लिए किसान का बेटा मुख्यमंत्री बने ये जरूरी है. बेनीवाल ने कहा कि पिछले 20 साल में जो हमारे लोगों के सीने पर गोलियां चली हैं, उसके बाद अब जरूरी है कि सत्ता की चाबी हमारे हाथ में होनी चाहिए.

पढ़ेंःवसुंधरा के बेटे दुष्यंत की कंपनी और ललित मोदी के बीच शेयरों की खरीद पर दिल्ली हाईकोर्ट हुआ सख्त, दिए निर्देश
इस दौरान बेनीवाल ने जाट समाज के कद्दावर नेता रहे मदेरणा का जिक्र करते हुए उस समय के नेताओं में दम होता था. वे किसान के बेटे थे, लेकिन वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे. बेनीवाल ने आरोप लगाया कि उस समय पार्टियों ने धोखा दिया और षडयंत्र किया था. जब भी मौका आता था तब दिल्ली से नेता थोप दिए जाते थे. लेकिन, फिर भी उस समय के मदेरणा जैसे नेताओं में दम होता था. एक फोन करने कर डीजी और मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारी कांपने लगते थे. लेकिन, आज के जमाने के हमारे समाज के जो नेता हैं. वे अपने जिले में थानेदार भी नहीं लगा सकते. बेनीवाल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि नागौर से दो मंत्री हैं, एक दिल्ली में और दूसरा किसान का बेटा कैबिनेट में है. लेकिन, फिर भी चलती यूनुस खान की है, ये नेता तो केवल मौका मुआयना में ही रहते हैं. इस दौरान बेनीवाल ने कहा कि ये लड़ाई हमारे भाइयों को न्याय दिलाने के लिए.

पढ़ेंः राहुल जी....रात्रि विश्राम करने से वोट नहीं मिलते - किरोड़ीलाल
29 अक्टूबर को जयपुर में महारैली करते हुए व्यवस्था परिवर्तन के लिए हुंकार भरेंगे. गौरतलब है कि प्रदेश में किसान नेता के रूप में पहचान बनाने वाले बेनीवाल चार बड़ी रैलियां कर चुके हैं. वे बीकानेर, बाड़मेर, नागौर और सीकर में रैली में जु़टी भीड़ को देखने के बाद से पूरे समाज को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं. वे लगातार इन क्षेत्रों में सक्रिय हैं. वहीं, हाल में जयपुर की महारैली के तारीख की घोषणा करने के बाद से वे इसकी तैयारी में जुट गए हैं. राजनीति के जानकारों का कहना है कि बेनीवाल प्रदेश में जाट समाज को एकत्रित करते हुए भाजपा-कांग्रेस के राजनीतिक समीकरण को बिगाड़ना चाहते हैं. यही वजह है कि चुनाव नजदीक आने के साथ ही वे लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में सभा करते हुए उन्हें जागरुक करने का काम कर रहे हैं.

CLOSE COMMENT

ADD COMMENT

To read stories offline: Download Eenaduindia app.

SECTIONS:

  होम

  राज्य

  देश

  दुनिया

  कारोबार

  क्राइम

  खेल

  मनोरंजन

  इंद्रधनुष

  सहेली

  गैलरी

  टूरिज़्म

  ASSEMBLY ELECTIONS 2018

  MAJOR CITIES