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स्वाइन फ्लू के बाद अब जयपुर बना जीका वायरस की राजधानी, राजस्थान में अब तक 42 पॉजिटिव

जयपुर: देशभर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप लगातार जारी है. लेकिन चिंता की बात ये है कि घर-घर दस्तक दे रही बीमारियों के मामले में राजस्थान पहले पायदान पर पहुंच रहा है. जीका वायरस और स्वाइन फ्लू में जहां राजस्थान पूरे भारत में पहले नम्बर पर है. वहीं दूसरी ओर डेंगू से मौत के ग्राफ में भी मरूधरा टॉप फाइव राज्यों में शामिल है.

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पूरा राजस्थान इन दिनों मौसमी बीमारी की जकड़ में है. ये जकड़ लोगों को बीमार ही नहीं कर रही बल्कि मौत भी बांट रही है. जी हां भले ही चिकित्सा महकमा दावे कर रहा हो कि राजस्थान को बीमारू प्रदेश की स्थिति से बाहर ला दिया गया है. लेकिन सच्चाई ये है कि स्वाइन फ्लू और डेंगू इस साल में 190 लोगों की जान ले चुका है. राजधानी में जीका वायरस का डर लोगों के मन में घर कर गया है.


मौसमी बीमारियां जो बरपा रही राजस्थान में कहर
जीका- इस वायरस के शिकार होने वालों में राजस्थान नम्बर वन है.
फरवरी 2017 में गुजरात के अहमदाबाद में तीन केस सामने आए.
जुलाई 2017 में तमिलनाडु के कृष्णागिरी में एक केस पॉजिटिव मिला.
22 सितम्बर 2018 जयपुर में पहला केस मिला. राजस्थान में अब तक 42 पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हुई है.

स्वाइन फ्लू- मौत-पॉजिटिव दोनों में अव्वल राजस्थान
राजस्थान में इस साल अब तक 1852 पॉजिटिव मरीज और 186 लोगों की जान जा चुकी है.
महाराष्ट्र में इस साल अब तक 1497 पॉजिटिव, 174 लोगों की जान जा चुकी है.
गुजरात में इस साल अब तक 1156 पॉजिटिव, 36 लोगों की मौत हुई.

डेंगू - टॉप फाइव में राजस्थान का नाम
केरला में इस साल अब तक 3660 पॉजिटिव केस, 35 लोगों की मौत.
महाराष्ट्र में इस साल अब तक 4667 पॉजिटिव केस, 18 लोगों की मौत.
छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक 1983 पॉजिटिव केस, 10 लोगों की मौत.
ओडिसा में इस साल अब तक 3883 पॉजिटिव केस, 5 लोगों की मौत.
राजस्थान इस मामले में पांचवे स्थान पर है, इस साल अब तक 3022 पॉजिटिव केस और चार लोगों की मौत हुई है.
क्या कहना है चिकित्सा विभाग का
इस चौंकाने वाली हकीकत को लेकर आमजन भले ही चिंतित हो. लेकिन गुड गवर्नेंस के दावे की शर्मसार तस्वीर सामने आने के बाद भी चिकित्सा विभाग इसे खुद की सजगता ही बता रहा है. हेल्थ निदेशकर डॉ. वीके माथुर का का कहना है कि यहां पर फ्री में जांच की सुविधाएं हैं. इसके साथ ही विभाग की सर्विलांस काफी निचले लेवल तक हो रही है. स्वास्थ्य महकमा खुद स्क्रीनिंग में जुटा है और सैंपल लेकर जांच करा रहा है. साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है.
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वहीं प्रदेश के सबसे बड़े sms अस्पताल में भी मौसमी बीमारियों के चलते ओपीडी का आंकड़ा एक दिन में 10 से 11 हजार तक जा पहुंचा है. हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मौसमी बीमारियों को लेकर सैपरेट वार्ड से लेकर जांच और इलाज की व्यवस्थाएं की गई हैं.
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sms अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस मीणा का कहना है कि सूबे के प्रशासनिक मुखिया यानि मुख्य सचिव ने मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए कमान संभाली है. जिला कलक्टरों को जिम्मा सौंपा गया है. ऐसे में देखना ये है कि चुनावी कामकाज में व्यस्त जिला कलेक्टर सीजनल डिजीज पर कितना कंट्रोल कर पाते है. लेकिन ये भी साफ है कि अगर समय रहते विभाग और प्रशासन नहीं चेते तो चुनाव के दौरान ये बीमारियां सरकार के वोटबैंक को भी बीमार करने में देर नहीं लगाएंगी.

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